मोदी जी...
आपको संसद में 1975 के आपातकाल की जानकारी देने या भाषण देने देश की जनता ने नहीं चुना है। आपकी भाषाशैली और Body Language आम जनता पिछले 10 सालों से सुन और देख रही है। आपके प्रयासों से राम मंदिर बन गया, धारा 370 हट गयी, बड़े-बड़े ब्रिज बन गये। जिसका परिणाम यह है कि, आज आप संसद में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर भाषणबाजी कर रहे है।
आप केंद्र में सबसे ऊँचे पायदान पर बैठे है। आप किसी पार्टी के प्रवक्ता नहीं है और न ही कोई पत्रकार। इसलिए जनता ने जिस उम्मीद के साथ आपको केंद्र में बिठाया है, उन उम्मीदों को पुरा करने पर अपना ध्यान केंद्रित कीजिये, न कि आपातकाल की यादों पर।
मुंबई में अभी बने नये ब्रिज पर पहली ही बारिश में क्रैक्स आ गये है। राम मंदिर के गर्भ गृह में पहली ही बारिश में पानी भर गया है। आपके शपथ गृहण समारोह के दिन हुए आतंकी हमले को आज 16 दिन पूर्ण हो चुके है। विपक्ष आपको कानून की पुस्तके दिखाकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है और सबसे बड़ी बात... आपका यह अंतिम कार्यकाल भी है, जो शायद पूरे 5 वर्षों का भी न हो। आप कभी भी उच्च पायदान से नीचे, सबसे नीचे वाले पायदान पर स्विप कर सकते है।
विकास-विकास...! देश को विकास से ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है। जनता को खुशहाल जीवन की जरूरत है।
जब एक पिता अपने भूखे बीवी-बच्चों को देखता है न, तो वह समय उसके लिए सबसे बुरा समय होता है। तब उसे अपने पुरुषत्व पर शर्म आने लगती है। जब एक बेटा अपने भूखे मां-बाप को देखता है न, वह समय उसके लिए सबसे बुरा होता है। अपने बेटा होने पर उसे शर्म आती है। जब एक जवान पुरुष के होते हुए उसकी बीवी को एक कटोरी सब्जी लेने पड़ोस में जाना पड़ता है न, तब पुरुषत्व को कलंकित होना पड़ता है। तब मानवता शर्मसार होती है।
अरे मोदी जी...! बहुत हो गया विकास, बहुत हो गयी Black Money पर बड़ी-बड़ी बातें। अब आम जनता की जीवनशैली का विकास करिये। अब भारत को सोने की चिड़ियाँ भले ही मत बनाइये, पर चिड़ियाँ दाना चुग सके। बस, इस लायक रहने दीजिये।
हमें गाँव ही प्यारे है। हमें जबरदस्ती शहर घुमाने मत ले जाइये। हमें Smart City नहीं, Unsmart Village चाहिए।🙏